औद्योगिक क्रांति के सामाजिक एवं आर्थिक परिणाम बताइए (audyogik kranti ke samajik avn arthik parinaam bataiye)

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औद्योगिक क्रांति के सामाजिक एवं आर्थिक परिणाम बताइए (audyogik kranti ke samajik avn arthik parinaam bataiye)

औद्योगिक क्रांति (audyogik kranti  –

औद्योगिक क्रांति (audyogik kranti) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांस के समाजवादी नेता जेरोम एडोल्फ ब्लांकी ने 1837 में किया था, आगे इंग्लैंड के ऑर्नाल्ड टायनबी मैं इसे लोकप्रिय बनाया औद्योगिक क्रांति के प्रारंभ की कोई निश्चित तारीख नहीं है! औद्योगिक क्रांति कोई आकस्मिक घटना नहीं है अपितु विकास की एक सतत प्रक्रिया है, जो वर्तमान में भी जारी है! 

औद्योगिक क्रांति के आर्थिक परिणाम (audyogik kranti ke aarthik parinam) – 

औद्योगिक क्रांति के परिणामों एवं प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं के अन्तर्गत समझा जा सकता हैं –

(1) बैंकिंग एवं मुद्रा प्रणाली का विकास – 

औद्योगिक क्रांति ने संपूर्ण आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया! परंपरागत बैंकिंग एवं मुद्रा प्रणाली की जगह आधुनिक बैंकिंग व मुद्रा प्रणाली का विकास हुआ हैं! बैंकों के माध्यम से लेन-देन, चेक, ड्राफ्ट आदि का प्रयोग किया जाने लगा! साथ ही धातु मुद्रा की जगह कागजी मुद्रा का प्रचलन हुआ! 

(2) उत्पादन एवं व्यापार में वृद्धि – 

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप वस्तुओं के उत्पादन एवं व्यापार में गुणात्मक एवं मात्रात्मक वृद्धि हुई! नवीन वस्तुओं एवं यातायात व संचार के साधनों का प्रयोग कर सकने के कारण मनुष्य का जीवन सुखमय हुआ! 

(3) नगरीकरण – 

औद्योगिक क्रांति से उपजे रोजगार के नए अवसरों की तलाश में लोग शहरीकरण की प्रक्रिया  तेवर हो गई औद्योगिक केंद्रों के आसपास नवीन शहर विकसित हुए इंग्लैंड में मैनचेस्टर, लिवरपूल, लीडर, फ्रांस में लियोन्स, जापान में ओसाका, अमेरिका में डेट्रायट  या शहरों का उदय हुआ

(4) रोजगार के अवसरों में वृद्धि – 

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप नवीन उद्योगों की स्थापना हुई! जिससे कृषि क्षेत्रों में जनसंख्या का दबाव कम हुआ तथा कृषि के अतिरिक्त अब औद्योगिक क्षेत्र में भी लोगों को रोजगार प्राप्त होने लगा! 

औद्योगिक क्रांति के सामाजिक परिणाम (audyogik kranti ke samajik parinam) – 

(1)  आधुनिक शिक्षा का विकास –  

औद्योगिक क्षेत्र में हुई प्रगति ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर दिया! व्यवसायिक, तकनीकी और प्रौद्योगिकी शिक्षा को अधिक महत्व दिया जाने लगा तथा विश्व के विभिन्न शहरों में बड़े-बड़े इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट संबंधी शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की गई! 

(2) सामाजिक कुरीतियों एवं रूढ़िवादिता में कमी – 

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप विभिन्न जाति-संप्रदाय को एक ही उद्योग में साथ साथ काम करना होता था, जिससे जातिप्रथा एवं छुआछूत के बंधन कमजोर हुए! साथ ही लोगों में दकियानूसी (रूढ़िवादी) प्रवृत्ति की जगह उन्मुक्त विचार पद्धति का विकास हुआ, परिणामस्वरूप सामाजिक रूढिवादिता में कमी आयी! 

(3) जनसंख्या में वृद्धि – 

औद्योगिक क्रांति ने जनसंख्या वृद्धि को प्रेरित किया! भौतिक संसाधनों में हुई वृद्धि से मानव का जीवन सुखमय हो गया, जिससे जन्म दर में वृद्धि हुई! इसी प्रकार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में हुए विकास से मृत्यु दर में कमी आई! इस प्रकार जन्म दर में वृद्धि एवं मृत्यु दर में कमी से जनसंख्या में अत्याधिक वृद्धि हुई! 

(4) महिला सशक्तिकरण – 

औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरुप अत्याधिक श्रम की आवश्यकता हुई, जिसकी पूर्ति पुरूषों से नहीं हो सकी, जिसके कारण महिलाओं को भी उद्योगों में रोजगार प्राप्त हुआ! जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ एवं वे अधिक अधिकारों की मांग करने लगी! इस प्रकार महिला सशक्तिकरण की पृष्ठभूमि तैयार हो गई! 

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